
मान लीजिए कि किसी मरीज को कई दिनों से खांसी है। डॉक्टर छाती का एक्स-रे करवाने को कहते हैं। रिपोर्ट में लिखा आता है, “दाएं फेफड़े के ऊपरी हिस्से में ओपेसिटी दिखाई दे रही है।”
रिपोर्ट पढ़ते ही परिवार घबरा जाता है। इंटरनेट पर खोजने पर कहीं इसे टीबी बताया जाता है, तो कहीं फेफड़ों का कैंसर। मरीज को समझ नहीं आता कि वह किस बात पर विश्वास करे।
यह एक आम स्थिति है। कुछ लोग एक्स-रे में सफेद धब्बा देखकर तुरंत कैंसर मान लेते हैं। वहीं कुछ लोग इसे पुरानी टीबी का निशान समझकर महीनों तक जांच नहीं करवाते।
दोनों ही तरीके गलत हो सकते हैं।
छाती के एक्स-रे में दिखाई देने वाला हर सफेद धब्बा कैंसर नहीं होता। यह पुरानी टीबी, निमोनिया, फेफड़ों में पानी, किसी संक्रमण, पुराने निशान या छोटी गांठ के कारण भी दिखाई दे सकता है। लेकिन केवल एक्स-रे देखकर इसका सही कारण तय करना हमेशा संभव नहीं होता।
इस ब्लॉग में मैं, डॉ. परवीन यादव, आपको समझाऊंगा कि एक्स-रे में सफेद धब्बा क्यों दिखाई देता है, टीबी और फेफड़ों के कैंसर में क्या अंतर होता है और डॉक्टर के पास जाने पर आगे कौन सी जांच हो सकती है।
स्वस्थ फेफड़ों में हवा भरी होती है, इसलिए एक्स-रे में उनका ज्यादातर हिस्सा काला दिखाई देता है। जब फेफड़े के किसी हिस्से में हवा की जगह सूजन, संक्रमण, पानी, पुराना निशान या कोई गांठ आ जाती है, तो वह हिस्सा सफेद या हल्का भूरा दिखाई दे सकता है।
रेडियोलॉजी रिपोर्ट में इसके लिए कुछ अंग्रेजी शब्द लिखे जा सकते हैं:
ये शब्द किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करते। इनका मतलब केवल इतना है कि फेफड़े का कोई हिस्सा सामान्य से अलग दिखाई दे रहा है।
एक छोटा गोल धब्बा फेफड़े की छोटी गांठ यानी लंग नोड्यूल हो सकता है। बड़ा या फैला हुआ सफेद हिस्सा निमोनिया, टीबी, फेफड़े में पानी, फेफड़े के सिकुड़ने या किसी बड़ी गांठ के कारण दिखाई दे सकता है।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक्स-रे में दिखने वाला सफेद धब्बा या तो टीबी है या कैंसर। असल में इसके कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
पुरानी टीबी का निशान: टीबी ठीक होने के बाद भी फेफड़े में निशान या कैल्शियम जमा हुआ छोटा धब्बा रह सकता है। यह कई वर्षों तक एक्स-रे में दिखाई दे सकता है।
निमोनिया: संक्रमण के कारण फेफड़े के छोटे वायुकोषों में द्रव या मवाद भर सकता है। इससे एक्स-रे में सफेद हिस्सा दिखाई देता है।
ग्रैनुलोमा: पुराने संक्रमण या सूजन के कारण बनने वाली छोटी गोल गांठ। यह अक्सर कैंसर नहीं होती।
फेफड़े के बाहर पानी: फेफड़े और छाती की दीवार के बीच पानी जमा होने को प्लूरल इफ्यूजन कहते हैं। एक्स-रे में यह अक्सर फेफड़े के निचले हिस्से में सफेद दिखाई देता है।
पुराना निशान: किसी पुराने संक्रमण, चोट या सर्जरी के बाद फेफड़े में बना निशान लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
सक्रिय टीबी: सक्रिय टीबी में फेफड़ों के अंदर सफेद पैच, गड्ढेनुमा कैविटी, छोटी गांठें या बढ़ी हुई लिम्फ नोड्स दिखाई दे सकती हैं।
फेफड़ों का कैंसर: शुरुआती कैंसर एक छोटी गांठ के रूप में दिखाई दे सकता है। बड़ा कैंसर अनियमित गांठ, फेफड़े के सिकुड़ने या लगातार बने रहने वाले धब्बे जैसा दिख सकता है।
दूसरे कैंसर का फैलाव: शरीर के किसी दूसरे अंग का कैंसर फेफड़ों में फैलकर एक या कई गांठें बना सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि केवल एक्स-रे देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि धब्बा पुराना निशान है या कोई सक्रिय बीमारी।
टीबी और फेफड़ों के कैंसर के कई लक्षण एक जैसे होते हैं। दोनों में खांसी, वजन कम होना, कमजोरी और खांसी में खून आना संभव है।
| विशेषता | टीबी | फेफड़ों का कैंसर |
|---|---|---|
| कारण | बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण | कैंसर कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि |
| बुखार | हल्का बुखार और रात में पसीना आम | शुरुआती अवस्था में कम आम |
| खांसी | बलगम के साथ हो सकती है | लगातार रहने वाली या बदलती हुई खांसी |
| वजन कम होना | हो सकता है | हो सकता है |
| एक्स-रे | पैच, कैविटी, निशान या छोटी गांठें | नोड्यूल, बड़ी गांठ या फेफड़े का सिकुड़ना |
| पुष्टि की जांच | बलगम और मॉलिक्यूलर जांच | बायोप्सी और पैथोलॉजी |
यह तालिका केवल सामान्य अंतर बताती है। किसी मरीज की बीमारी की पुष्टि केवल लक्षणों या एक्स-रे से नहीं की जा सकती।
याद रखें, कुछ मरीजों में टीबी और फेफड़ों का कैंसर एक साथ भी हो सकते हैं। इसलिए धूम्रपान करने वाले या अधिक जोखिम वाले मरीज में किसी धब्बे को केवल टीबी मान लेना सुरक्षित नहीं है।
एक्स-रे में सफेद धब्बा दिखाई देने के साथ नीचे दिए गए लक्षण भी हों तो विशेषज्ञ डॉक्टर से जल्द मिलें:
इनमें से कोई भी लक्षण होने का मतलब यह नहीं कि कैंसर निश्चित है। इसका मतलब केवल इतना है कि सही कारण जानने के लिए आगे की जांच जरूरी है।
ज्यादातर मरीजों और उनके परिवार को यह नहीं पता होता कि एक्स-रे में धब्बा मिलने के बाद आगे क्या होता है। हर मरीज को तुरंत बायोप्सी की जरूरत नहीं पड़ती। जांच एक निश्चित क्रम में की जाती है।
डॉक्टर सबसे पहले पुराने एक्स-रे या सीटी स्कैन देखते हैं। अगर वही धब्बा कई वर्षों से बिना किसी बदलाव के मौजूद है, तो उसके सामान्य होने की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए डॉक्टर के पास केवल नई रिपोर्ट लेकर न जाएं। पुरानी फिल्म, सीडी और डिजिटल तस्वीरें भी साथ रखें।
छाती का एक्स-रे एक सपाट तस्वीर होती है। इसमें पसलियां, खून की नसें, हृदय और फेफड़ों के दूसरे हिस्से एक-दूसरे के ऊपर दिखाई देते हैं।
सीटी स्कैन फेफड़ों की ज्यादा स्पष्ट और विस्तृत तस्वीर देता है। इससे डॉक्टर को पता चलता है:
अगर सक्रिय टीबी का संदेह हो तो बलगम की जांच और मॉलिक्यूलर टेस्ट करवाए जा सकते हैं। इन जांचों से टीबी के बैक्टीरिया और कुछ मामलों में दवा के प्रति उसके प्रतिरोध की जानकारी मिल सकती है।
केवल एक्स-रे देखकर सक्रिय टीबी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
अगर सीटी स्कैन में कोई संदिग्ध गांठ दिखाई देती है तो पीईटी-सीटी की जरूरत पड़ सकती है। इससे गांठ की सक्रियता, लिम्फ नोड्स और शरीर के दूसरे हिस्सों की जांच करने में मदद मिलती है।
लेकिन पीईटी-सीटी में सक्रियता दिखाई देने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। टीबी, निमोनिया और दूसरी सूजन भी इसमें सक्रिय दिखाई दे सकती है।
कैंसर की पुष्टि के लिए गांठ से ऊतक का नमूना लेना पड़ सकता है। इसे बायोप्सी कहते हैं।
गांठ की जगह के अनुसार जांच का तरीका चुना जाता है:
छोटी, चिकनी और कम जोखिम वाली गांठ को कुछ समय बाद दोबारा सीटी स्कैन करके देखा जा सकता है। हर गांठ की तुरंत बायोप्सी करवाना जरूरी नहीं होता।
जल्दी जांच की जरूरत तब बढ़ जाती है जब धब्बा:
दोबारा जांच करवाने का मतलब यह नहीं कि डॉक्टर समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसका उद्देश्य समय के साथ होने वाले बदलाव को देखना और बिना जरूरत की बायोप्सी या सर्जरी से बचना है।
इलाज सफेद धब्बे के असली कारण पर निर्भर करता है।
संक्रमण या टीबी: जरूरी जांचों के बाद एंटीबायोटिक या टीबी की दवाएं दी जा सकती हैं।
फेफड़े के बाहर पानी: कारण के अनुसार पानी निकालने और आगे इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
सामान्य छोटी गांठ: छोटी और बिना बदलाव वाली गांठ को समय-समय पर सीटी स्कैन से देखा जा सकता है।
शुरुआती फेफड़ों का कैंसर: अगर कैंसर छोटा है और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैला है, तो सर्जरी से प्रभावित हिस्सा हटाया जा सकता है।
कुछ मरीजों में VATS या रोबोटिक सर्जरी के जरिए छोटे चीरों से ऑपरेशन किया जा सकता है। कैंसर की अवस्था के अनुसार कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी की भी जरूरत पड़ सकती है।
भारत में टीबी आम है। इसी कारण मरीज और उनके परिवार एक्स-रे में दिखाई देने वाले हर धब्बे को पुरानी टीबी से जोड़ देते हैं।
इस सोच के कारण तीन गलतियां सबसे ज्यादा होती हैं:
सही तरीका यह जानना है कि धब्बा पुराना और बिना बदलाव वाला है या नया और बढ़ता हुआ। इसी जानकारी से आगे की जांच और इलाज की योजना बदल सकती है।
छाती के एक्स-रे में सफेद धब्बा दिखाई देने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। यह संक्रमण, पुरानी टीबी, फेफड़े में पानी, पुराने निशान, छोटी गांठ या फेफड़ों के कैंसर के कारण हो सकता है।
इस ब्लॉग की मुख्य बातें:
एक सवाल खुद से पूछें: अगर यही रिपोर्ट आपके किसी प्रियजन की होती, तो क्या आप बिना जांच के इसे पुरानी टीबी मान लेते?
अगर जवाब नहीं है, तो अपनी रिपोर्ट को भी उतनी ही गंभीरता से लें।
फेफड़े की छोटी गांठ के बारे में अधिक जानने के लिए हमारा ब्लॉग Lung Nodule vs Lung Cancer: How to Tell the Difference पढ़ें।
अगर आपके छाती के एक्स-रे में कोई सफेद धब्बा, छोटी गांठ या संदिग्ध परछाईं दिखाई दी है, तो डॉ. परवीन यादव से परामर्श लें। अपनी वर्तमान और पुरानी सभी जांचों की तस्वीरें साथ लेकर आएं। सही समय पर की गई जांच बेवजह के डर को कम कर सकती है और जरूरत होने पर इलाज में देरी होने से बचा सकती है।
नहीं। यह पुरानी टीबी, निमोनिया, फेफड़े में पानी, पुराने निशान या सामान्य छोटी गांठ के कारण भी हो सकता है। सही कारण जानने के लिए सीटी स्कैन या दूसरी जांच की जरूरत पड़ सकती है।
कुछ मरीजों में टीबी ठीक होने के बाद निशान या कैल्शियम जमा हुआ हिस्सा लंबे समय तक एक्स-रे में दिखाई दे सकता है। अगर धब्बा नया है या बढ़ रहा है, तो उसे पुराना निशान मानने से पहले जांच जरूरी है।
नहीं। टीबी, संक्रमण और सूजन भी पीईटी-सीटी में सक्रिय दिखाई दे सकते हैं। कैंसर की पक्की पुष्टि के लिए बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है।
जब गांठ बढ़ रही हो, उसकी बाहरी सीमा अनियमित हो, पीईटी-सीटी में संदिग्ध दिखाई दे या सीटी स्कैन कैंसर की संभावना बताए, तब बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है।
फेफड़ों में संदिग्ध धब्बा, नोड्यूल या बड़ी गांठ दिखाई देने पर पल्मोनोलॉजिस्ट या थोरेसिक सर्जन से सलाह ली जा सकती है। अगर बायोप्सी या सर्जरी की जरूरत हो, तो थोरेसिक सर्जन आगे के इलाज की योजना बनाने में मदद करता है।
National Cancer Institute: Lung Cancer Screening
American College of Radiology: Imaging of Possible Tuberculosis

18+ Yrs Exp | 5,700+ Thoracic & Robotic Cancer Surgeries
Dr. Parveen Yadav is a Director and Senior Consultant in Thoracic and Surgical Oncology, specializing in minimally invasive and robotic lung and esophageal surgeries, with advanced training from AIIMS and Tata Memorial Hospital.
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